लगातार बदलती हुए जीवनशैली, तनाव आदि के कारण बहुत से बीमारिया होने लगी हैं, जिसमे से मधुमेह भी एक है| यह आज के समय में एक आम बीमारी हो गयी है| इस लेख में हम आपको मधुमेह (शुगर या डायबिटीज) के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में बताएँगे|

डायबिटीज का संबंध उपापचय रोगों के समूह से है अथवा आपके शरीर के शुगर और ब्लड ग्लूकोज लेवल को नियंत्रित करने को डायबिटीज कहा जाता है| इसे हिंदी में मधुमेह कहा जाता है| आम भाषा में इसको शुगर भी कहते है| हम आपको मधुमेह (शुगर या डायबिटीज) के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में बताने से पहले यह बता दे की, मधुमेह दो प्रकार की होती हैं, टाइप -1 और टाइप -2|

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टाइप -1 मधुमेह में शरीर की एंटीबॉडीज के कारण पाचक ग्रंथि खराब हो जाती है और आपका शरीर इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता है| टाइप -1 मधुमेह से ग्रसित लोगों को ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने के लिए प्रतिदिन इन्सुलिन के इंजेक्शन लेने की जरूरत होती है|

टाइप -2 मधुमेह को नॉन-इंसुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज के नाम से जाना जाता है| बच्चों में बढ़ते मोटापे के कारण आज कल टाइप -2 मधुमेह किशोरों और छोटे बच्चों में लगातार बढ़ती एक समस्या बन गया है| नियमित रूप से व्यायाम या शारीरिक गतिविधि न करने के कारण सुस्त जीवनशैली भी टाइप -2 मधुमेह का एक कारण होती है|

टाइप -2 मधुमेह का चित्र

शरीर में इन्सुलिन के प्रतिरोध के कारण टाइप -2 मधुमेह हो जाती है; उदाहरण के लिए आपकी पाचक ग्रंथि (अग्नाशय) लगातार इन्सुलिन का उत्पादन करती रहती है, जबकि यह उत्पादन आपकी शरीर की इंसुलिन की आवश्यकता से बहुत अधिक होता है और कोशिकाएं इतने अधिक इन्सुलिन का उपयोग करने में असमर्थ हो जाती हैं|

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ये सभी कारक मिलकर आपके खून में शुगर की मात्रा को बढ़ाते हैं तथा ब्लड ग्लूकोस को खतरे के संकेत तक बढ़ा देते हैं| अगर बढ़े हुए ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह गंभीर बीमारियों को बढ़ावा दे सकता है, जैसे कि:

यहाँ हम आपको मधुमेह (शुगर या डायबिटीज) के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में बताने जा रहे हैं|

मधुमेह के कारण और जोखिम

  • अधिकांश लोगों को टाइप -2 मधुमेह उनके माता-पिता या दादा-दादी से विरासत में मिला होता है| अध्ययन बताते हैं कि आपके डीएनए के कुछ भाग यह निर्धारित करते हैं कि आपका शरीर इन्सुलिन का उत्पादन और क्रिया कैसे करेगा|
  • मोटापा या पेट में अधिक वसा जमा हो जाना
  • लिवर के द्वारा अनियंत्रित ग्लूकोस का उत्पादन
  • सोने की अनियमित आदतें; जैसे बहुत अधिक या बहुत कम नींद लेना
  • धूम्रपान
  • चिंता, तनाव और डिप्रेशन
  • व्यायाम या शारीरिक गतिविधि न करना
  • हाई ब्लड प्रेशर, एचडीएल स्तर निम्न होना और हाई ट्राइग्लिसराइड
  • गर्भावस्था के दौरान गर्भावधि मधुमेह का विकास होना अथवा चार किलो से अधिक वजनी बच्चे को जन्म देना
  • महिलाओं में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस)

टाइप -2 मधुमेह के लक्षण

  • बार-बार पेशाब आना
  • पूरा दिन बहुत ज्यादा प्यास लगना
  • खाने के बाद भी बहुत अधिक भूख लगना
  • नजरें कमजोर होना या धुंधला दिखाई देना
  • चोट या घावों का धीरे-धीरे ठीक होना
  • चिड़चिड़ापन या थकान का आभास
  • अचानक से वजन घटना या बढ़ना
  • हाथों या पैरों का सुन्न हो जाना या झुनझुनी होना
  • बार-बार यीस्ट इन्फेक्शन होना (त्वचा या मूत्रमार्ग)

टाइप -2 मधुमेह की रोकथाम

  • स्वस्थ रहने के लिए शारीरीक काम करते रहिये, जिससे आपके शरीर का भार आपके बीएमआई के अनुरूप हो|
  • धूम्रपान न करें| विशेष रूप से धूम्रपान करना आपको पैंतालीस की उम्र के बाद टाइप -2 मधुमेह के खतरे पर ले जाता है|
  • जितना संभव हो, शरीर में एकडीएल कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करके एचडीएल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाइए|
  • अगर आपके परिवार के किसी सदस्य को टाइप -2 मधुमेह है, तो आप जितना जल्दी हो सके, चीनी का सेवन कम कर दीजिये|
  • ए1सी परीक्षण के द्वारा ब्लड शुगर लेवल की जांच करवाते रहें| इस परीक्षण में आपके पिछले तीन पहिने के ब्लड ग्लूकोस लेवल की जांच की जाती है| जांच के परिणाम आने के बाद शुगर लेवल को नियंत्रित रखने के प्रयास कीजिये|
  • स्वस्थ जीवन जीने के लिए अभी भी देर नहीं हुई है| आज से ही स्वास्थ्यवर्धकभोजन का सेवन कीजिये और सक्रिय जीवनशैली अपनाइए|

टाइप -2 मधुमेह को नियंत्रित करने के उपचार

मधुमेह एक जीवन पर्यंत चलने वाली बीमारी है| हालाँकि हल्के व्यायाम और अच्छे भोजन से आप मधुमेह को नियंत्रण में रख सकते हैं और लंबा व स्वस्थ जीवन जी सकते हैं|

इस लेख में व्यायाम और भोजन की आदतों के साथ-साथ मधुमेह (शुगर या डायबिटीज) के लक्षण, कारण और इलाज बताये जा रहे हैं, जिनके इस्तेमाल से आप मधुमेह को नियंत्रित कर सकते हैं|

विधि 1: सेब के सिरका द्वारा

सेब के सिरके को सभी बीमारियों का रामबाण इलाज कहा जा सकता है| टाइप -2 मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए रॉ, अनफिल्टर्ड सेब का सिरका काफी फायदेमंद होता है| इसमें एसिटिक एसिड पाया जाता है, जो भोजन के ग्लाइसेमिक प्रभाव को कम करता है| इस प्रकार से यह ब्लड शुगर लेवल को अचानक से बढ़ने से बचाता है|

ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित करने के लिए दालचीनी काफी सहायक होती है| यह शरीर में इन्सुलिन की ग्रहणशीलता को बढ़ा देती है| आप चाय या कॉफ़ी में भी दालचीनी का इस्तेमाल कर सकते हैं|

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आवश्यक सामग्री:

सेब के सिरके के इस्तेमाल के लिए आवश्यक सामग्री

  • सेब का सिरका (भोजन के ग्लाइसेमिक इंडेक्स को कम करता है) – दो बड़े चम्मच (लगभग 30 मिली0)
  • सेब का रस (फाइबर की अधिकता) – दो बड़े चम्मच (लगभग 30 मिली0)
  • दालचीनी पाउडर (इन्सुलिन की ग्रहणशीलता को बढ़ाती है) – आधा छोटा चम्मच (लगभग 2 ग्राम)
  • ठण्डा पानी – तीन चौथाई कप (लगभग 177 मिली0)
  • वनीला लिक्विड स्टेविया – चार बूँदें
  • बर्फ (आइस क्यूब्स) – दो से चार

1. सेब का सिरका, दालचीनी, सेब का रस और वनीला लिक्विड स्टेविया को जार में डालें

सभी सामग्रियों को एक जार में डालें

  • एक जार में दो बड़े चम्मच सेब का सिरका डालें|
  • इसमें दो बड़े चम्मच सेब का रस और आधा छोटा चम्मच दालचीनी पाउडर डालें|
  • इस जार में वनीला लिक्विड स्टेविया की चार बूँदें डालें|

2. इसमें पानी और बर्फ डालें

जार में बर्फ और पानी डालें

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  • जार में लगभग तीन चौथाई कप पानी डालें|
  • सभी पदार्थों को लकड़ी की चम्मच की सहायता से अच्छी तरह से मिला लें|
  • आइस ट्रे से बर्फ निकाल लें| इसमें दो से चार आइस क्यूब्स डालें|
  • मधुमेह को नियंत्रित रखने के लिए नियमित रूप से प्रत्येक सुबह इस मिश्रण का सेवन करें|
  • अथवा आप एक गिलास (लगभग 250 मिली0) पानी में एक बड़ा चम्मच सेब का सिरका मिलाकर सुबह खाली पेट इसका सेवन कर सकते हैं|
तैयार मिश्रण का सेवन कीजिये
मधुमेह के संतुलन के लिए सेब के सिरके के पेय का सेवन कीजिये

विधि 2: करेले के सेवन से

करेला का स्वाद काफी कड़वा होता है, लेकिन करेले के रस के सेवन से आप मधुमेह को नियंरित रख सकते हैं| हरे रंग की इस सब्जी में निम्नलिखित सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं, जो मधुमेह को नियंत्रित रखने में सहायक होते हैं:

  • कैरेंटिन – यह ब्लड ग्लूकोस लेवल को कम करता है|
  • विसाइन – इसके हाइपोग्लाइसेमिक प्रभाव पड़ते हैं|
  • पॉलीपेप्टाइड-पी – यह एक इन्सुलिन होता है, जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है|
  • लेक्टिन – यह खाना खाने के बाद एपेटाइट को खत्म करता है, ग्लाइसेमिक लेवल को कम करता है|

करेले के रस का सेवन कीजिये

करेले का रस पीजिये
करेले का रस मधुमेह को नियंत्रित करता है
  • प्रतिदिन दो गिलास करेले के रस का सेवन कीजिये|
  • आप एक से तीन बड़े चम्मच (लगभग 15 से 45 मिली0) करेले के रस को अपने पसंदीदा रस; जैसे सेब, गाजर या खेरे के रस में मिलाकर खाना खाने से पहले इसका सेवन कर सकते हैं| आप करेले का रस निकालते समय इसमें सेब, गाजर या खीर भी मिला सकते हैं|
  • आप करेले के सप्लीमेंट भी ले सकते हैं| आपको 500 mg की एक कैप्सूल को दिन में एक बार लेना होता है|
  • आप अपने भोजन में प्रतिदिन करेले की सब्जी भी शामिल कर सकते हैं|

नियमित रूप से इस उपचार के इस्तेमाल से आपको एक माह में ही ब्लड ग्लूकोज में प्रभावी रूप से कमी दिखाई देगी| टाइप -2 मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए नियमित रूप से करेले का सेवन करते रहिये|

विधि 3: भिंडी के पानी का सेवन

हल की सालों में भिंडी को ब्लड शुगर लेवल कम करने के लिए जाना जाने लगा है| भिंडी को अपने प्रतिदिन के भोजन में शामिल करके आप मधुमेह को नियंत्रित कर सकते हैं|

आवश्यक सामग्री:

भिंडी का पानी बनाने के लिए आवश्यक सामग्री

  • मध्यम आकार की भिंडी (ब्लड शुगर कम करती है) – चार से पांच भिंडी
  • हवाबंद जार
  • पानी

1. भिंडियों को काटकर रातभर पानी में रख दीजिये

भिंडियों को काटकर पानी में भीगने दीजिये

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  • चार से पांच ताजी भिंडियों को अच्छी तरह से धो लीजिये|
  • इन्हें बीच से काटकर हवाबंद/एयरटाइट जार में रख दीजिये|
  • जार को पूरा पानी से भर दीजिये|
  • अब जार का ढक्कन बंद कर दीजिये और भिंडियों को आठ से चौबीस घंटे तक पानी में भीगने दीजिये| अगर आप इस उपचार को शाम के समय इस्तेमाल करते हैं, तो भिंडियां रातभर पानी में भीग सकेंगी|

2. भिंडी के पानी को छानकर इसका सेवन कीजिए

इस पानी को छान लीजिये

  • अगली सुबह भिंडी के पानी को छान लीजिये|
  • ब्लड शुगर को कम करने के लिए प्रतिदिन सुबह इस पानी का सेवन कीजिये|

चार से छह हफ़्तों तक इस उपचार के इस्तेमाल से आपको ब्लड शुगर लेवल में कमी दिखाई देगी|

भिंडी के पानी का सेवन कीजिये
मधुमेह की रामबाण दवा के लिए भिंडी के पानी का सेवन कीजिये

विधि 4: व्यायाम और योग द्वारा

एक सुस्त और ढीली-ढाली जीवनशैली विशेष रूप से किशोरों और बच्चों में मधुमेह के बढ़ने का एक सबसे बड़ा कारण होता है|

सप्ताह में दो से तीन बार शारीरिक गतिविधि; जैसे तैराकी और डांस को बच्चों की दिनचर्या में शामिल करके मधुमेह की रोकथाम की जा सकती है तथा ब्लड शुगर लेवल और कोलेस्ट्रॉल स्तर को भी नियंत्रित किया जा सकता है|

एरोबिक और कठोर व्यायाम मधुमेह में काफी सहायक होते हैं| पांच दिनों तक आधे घंटे के लिए एरोबिक व्यायाम करके आप ब्लड शुगर लेवल को प्रभावी रूप से कम कर सकते हैं| अगर आप वजन कम करना चाहते हैं, तो भी प्रतिदिन आधे घंटे का व्यायाम आपके लिए फायदेमंद होगा|

आप दो सप्ताह तक नियमित रूप से व्यायाम कर सकते हैं| ताई-ची व्यायाम विशेष रूप से मधुमेह रोगियों के लिए लाभकारी होता है| इस व्ययाम से चिंता और तनाव भी कम होता है|

# व्यायाम

i) तेज चलना
तेज चलने का व्यायाम कीजिये
प्रतिदिन आधे घंटे तक तेज-तेज चलिए
  • कठोर व्यायाम आरम्भ करने से पहले स्ट्रेचिंग कीजिये|
  • अपने हाथों और पीठ को सीधा रखकर सीधे खड़े हो जाइए|
  • आपका सिर, रीढ़ की हड्डी के सीध में होना चाहिए और आपको सामने की ओर देखना है, न कि नीचे की ओर|
  • अब सामान्य रूप से चलना आरम्भ कीजिये|
  • फिर तेज चला आरम्भ कीजिये और इस गति को कायम रखिये|

प्रत्येक सुबह आधे घंटे तेज चलने की आदत बनाइए|

ii) तैरना
तैरने का व्यायाम कीजिये
तैरने का व्यायाम करके आप उपापचय को बढ़ा सकते हैं
  • तैरना, ह्रदय से संबंधित व्यायाम होता है, जिससे आपके शरीर की ऊर्जा का ह्रास होता है और उपापचय में वृद्धि होती है|
  • आरम्भ में आप सप्ताह में दो से इन बार तैरिये| फिर धीरे-धीरे सप्ताह में पांच बार तैरना आरम्भ कीजिये|
  • तैरना आरम्भ करने के पहले और बाद में ब्लड ग्लूकोज लेवल की जांच कीजिये, ताकि आपको तैरने के प्रभावों का पता चल सके|
  • अब आप अपने अनुसार सप्ताह में पांच से छह बार तैर सकते हैं|
iii) साइकिल चलाना
साइकिल चलाइये
प्रतिदिन आधा घंटे तक साइकिल चलाइये
  • मधुमेह को नियंत्रण में रखने के लिए साइकिल प्रतिदिन आधा घंटे तक साइकिल चलाइये|
  • साइकिल चलाने से फेफड़ों और ह्रदय का स्वास्थ्य भी बेहतर होता है|
  • जब कभी संभव हो तो आपको पहाड़ों पर बाइक चलाने जाना चाहिए| इससे अधिक ऊर्जा का ह्रास होता है|
  • साइकिल चलाने के पहले और बाद में ब्लड ग्लूकोज लेवल की जांच कीजिये, ताकि आपको साइकिल चलाने के फायदे का पता चल सके|

# योग

i) धनुरासन
धनुरासन का अभ्यास कीजिये
दिन में तीन से पांच बार धनुरासन कीजिये
  • अपने चेहरे को जमीन की ओर करके योगा मैट पर लेट जाइए|
  • अपने पैरों को पीछे की ओर ऊपर उठाकर हाथों को पीछे करके पैरों के पंजों को पकड़ लीजिये|
  • अपने पैरों को धीरे-धीरे ऊपर उठाइये और घुटनों को मोड़िये|
  • अपने हाथों को पीछे की ओर खींचिए|
  • गहरी साँस लेकर छाती को ऊपर उठाइये|
  • पैरों के पंजों को खींचते हुए पैरों को ऊपर उठाइये|
  • अपने सिर को ऊंचा उठाकर अपना पूरा भार पेट पर पड़ने दीजिये| ऐसा करके जितनी देर आप साँस रोक सकते हैं, रोक लीजिये|
  • धीरे-धीरे साँस छोड़कर पैरों को नीचे करते जाइए|
  • अपनी आरंभिक अवस्था में वापस आ जाइए|

दिन में तीन से पांच बार इस आसान को दोहराइए|

ii) शवासन
शवासन का अभ्यास कीजिये
सोने से पहले शवासन कीजिये
  • गर्दन के नीचे एक तकिया (अगर आवश्यक हो) लगाकर योगा मैट पर सीधा लेट जाइए|
  • अपने पैरों को सामान्य दूरी पर रखकर पैरों के अंगूठों को ऊपर की ओर कीजिये|
  • अपने हाथों को शरीर से थोड़ा दूर रखिये|
  • शरीर के प्रत्येक हिस्से पर ध्यान केन्द्रित करके अपने दायें पैर से शवासन आरम्भ कीजिये|
  • एक गहरी साँस लीजिये और इसे धीरे-धीरे छोड़िये| फिर अपने शरीर को ढीला छोड़ दीजिये|
  • अब इस मुद्रा में रहकर आँखें बंद करके दस से पंद्रह मिनट तक साँस लीजिये|
  • फिर धीरे-धीरे आँखें खोलिए|

मधुमेह के कारण ह्नोने वाली हाइपरटेंशन से निजात पाने के लिए प्रत्येक रात सोने से पहले इस आसन का अभ्यास कीजिये|

iii) बालासन
बालासन का अभ्यास कीजिये
दिन में एक बार बालासन कीजिये
  • योगा मैट पर अपने पैरों को जोड़कर घुटनों के बल बैठ जाइये| अब अपने घुटनों को हिप की दूरी के बराबर दूरी पर रखिये|
  • गहरी साँस लीजिये और धीरे-धीरे छोड़िये| ऐसा करते हुए सभी चिंताएं त्याग दीजिये|
  • साँस छोड़ते हुए अपने ऊपरी शरीर को नीचे की ओर लाइए|
  • अपनी छाती को जांघों पर रखिये और अपने सिर को जमीन तक स्पर्श कराने तक झुकिए|
  • अपने हाथों को कंधों की सीध में रखते हुए आगे की ओर फैलाइये|
  • हथेलियों को सीधा जमीन पर रखिये|
  • एक मिनट तक इसी अवस्था में बने रहिये|
  • अपने ऊपरी शरीर को ऊपर उठाते हुए गहरी साँस लीजिये|
  • अब धीरे-धीरे सांस छोड़िये|

प्रत्येक रात सोने से पहले इस आसन को दोहराइए| आपको दिन में एक बार ही बालासन करना है|

Vi) कपालभाती प्राणायाम
कपालभाती प्राणायाम का अभ्यास
प्रतिदिन कपालभाती प्राणायाम कीजिये
  • पाल्थी लगाकर योगा मैट पर बैठ जाइए|
  • आपको अपनी पीठ को सीधा रखना है|
  • अपनी हथेलियों को ऊपर की ओर खोलकर घुटनों पर रखिये|
  • गहरी साँस लीजिये और धीरे-धीरे छोड़िये|
  • एक बार में पंद्रह से बीस बार इस तरह से साँसें लीजिये|

उपापचय को बढ़ाने और मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए प्रतिदिन पांच से दस मिनट तक ऐसा कीजिये|

विधि 5: मेथी के इस्तेमाल से

मेथी में अधिक मात्रा में घुलनशील फाइबर पाए जाते हैं, जो आपके ब्लड ग्लोकोज लेवल को निम्न करने में सहायक हैं| मेथी आपकी पांच क्रिया को धीमा करके और कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को कम करके मधुमेह के लिए फायदेमंद होती है|

इसके इस्तेमाल से कम भोजन करके भी आपको पेट भरा होने का अहसास होता है और आपका ब्लड शुगर लेवल लगातार धीरे-धीरे कम होता जाता है|

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हालाँकि अपने वजन के अनुसार मेथी की सही मात्रा के सेवन के लिए अपने डॉक्टर से सलाह लें|

प्रतिदिन पानी में भीगी हुई मेथी का सेवन कीजिये

मेथी का इस्तेमाल कीजिये
मेथी का इस्तेमाल; मधुमेह का घरेलू उपचार है
  • आप अपने भोजन में मेथी का इस्तेमाल बढ़ा सकते हैं| आप पिसी हुई मेथी को भोजन पर छिड़क सकते हैं|
  • अथवा आप दो बड़े चम्मच (लगभग 30 ग्राम) मेथी के दानों को एक गिलास (लगभग 250 मिली0) पानी में रातभर के लिए भिगो दीजिये|
  • अगली सुबह खाली पेट मेथी के साथ इस पानी को पी लीजिये|
  • रक्तचाप को निम्न करने के लिए इसे कुछ महीनों तक लगातार उपयोग कीजिये|
  • आप दो बड़े चम्मच (लगभग 30 ग्राम) मेथी पाउडर को एक गिलास (लगभग 250 मिली0) पानी में मिलाकर प्रतिदिन इसका सेवन कर सकते हैं|

विधि 6: संतुलित आहार (डाइट) द्वारा

स्वास्थ्यवर्धक भोजन प्रभावी रूप से आपके ब्लड शुगर लेवल को संतुलित करने में सहायक होता है| अपने भोजन में चीनी न शामिल करके आप ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रण में रख सकते हैं|

कार्बोहाइड्रेट; जैसे सफेद चावल और आलू का सेवन न करें| ताजे फल और सब्जियों को अपने भोजन में शामिल करें|

मीट, प्रोसेस्ड रेड मेट के सेवन पर  नियंत्रण रखें| सप्ताह में दो से चार बार सैल्मन, हेरिंग और लेक ट्राउट मछलियों का सेवन करें|

स्वास्थ्यवर्धक आहार लें
स्वास्थ्यवर्धक भोजन का सेवन करें

आपको रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट; जैसे सफेद ब्रेड और पास्ता का सेवन कम से कम करना चाहिए| इसके बजाय आपको साबुत अनाजों; जैसे ब्राउन ब्रेड, ब्राउन राइस, जौ और उच्च फाइबर वाले भोजन का सेवन करना चाहिए|

वसामुक्त और शुगर-फ्री दही (योगर्ट), शुगर-फ्री पेय का सेवन आपके लिए काफी अच्छा रहेगा|

सुझाव

  • अपने भोजन में अधिक मात्रा में अदरक और लहसुन शामिल करें| आप इन्हें मीट, सब्जियों या सूप आदि में मिला सकते हैं| आप अदरक या लहसुन के अचार भी ले सकते हैं|
  • अपने शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए आपको अधिक मात्रा में पानी पीना चाहिए| इससे आपकी किडनी को अतिरिक्त शुगर को पेशाब के द्वारा बाहर निकालने में सहायता मिलती है|
  • एक साथ बहुत अधिक भोजन न करें| थोड़ी-थोड़ी देर में कम खाएं|
  • अण्डों का अधिक सेवन करें क्योंकि इनमें प्रोटीन और क्रोमियम अधिक मात्रा में पाया जाता है, जो ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में सहायक हैं|
  • मैग्नीशियम की अधिकता वाले खाद्य पदार्थ; जैसे केला, एवोकाडो, हरे पत्तेदार सब्जियां, डार्क चॉकलेट और बीन्स आपके ब्लूग शुगर लेवल को संतुलित रखने में सहायक हैं|
  • ध्यान रखिये कि आपका ब्लड शुगर लेवल 12 mmol/l से अधिक होना चाहिए| इससे कम होने पर आपको हाइपोग्लाइसीमिया की दिक्कत हो सकती है|
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